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श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर

बायीं और थोड़ी सी ऊँचाई चढ़कर दिगम्बर जैन मंदिर और धर्मशाला का विशाल द्वार मिलता है| द्वार पर ही श्री दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र के मेनेजर का कार्यालय एव कमेटी का कार्यालय है| गाते के ऊपर विशाल दो पानी की टंकी श्री महेंद्र कुमार जैन सर्राफ, सदर मेरठ की और से बनवाई गयी है| सारे क्षेत्र पर पानी की सप्लाई यहीं से होती है| अंदर प्रविष्ट होते ही पक्का कुआँ और धर्मशाला है, फिर एक स्वर्णिम द्वार मिलता है, जो मंदिर का प्रवेश द्वार है, द्वार के पास एक 31 फीट ऊँचा मानस्तंभ बना हुआ है| जिसका निर्माण सन 1955 में श्री उग्रसेन शीतल प्रसाद जैन सौदागर मेरठ ने कराया| चारों और जिनमन्दिर है तथा बीच में मुख्य मंदिर है| मंदिर लगभग चार फीट ऊँची चौकी देकर बनाया गया है, और मंदिर के चारों और रैलिंगदार चबूतरा है| मंदिर में केवल एक ही खंड है, और यह काफी बड़ा है| इस मंदिर में केवल एक ही वेदी है| वेदी तीन दरवाजे की है और काफी विशाल है| मूलनायक प्रतिमा भगवान शांतिनाथ की है| यह श्वेत पाषाण की लगभग एक हाथ लम्बी पदमासन प्रतिमा है| यह मूर्ति जीवराज जी पापड़ीवाल सन 1548 बैशाख सुदी तीज को भट्टारक जिनचंद्र द्वारा प्रतिष्ठित करायी थी|

इसके दायीं और भगवान अहरनाथ और बायीं और भगवान कुंधुनाथ की मूर्ति स्थापित है| वेदी में पांच बालयति (भगवान वासुपूज्य, भगवान मल्लिनाथ, भगवान नेमिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ व भगवान महावीरस्वामी) का एक फलक काफी प्राचीन प्रतीत होता है| बीच की प्रतिमा पदमासन और दो प्रतिमा खडगासन है| दो प्रतिमाएं खंडित है| संभवत: मुस्लिम काल में मुज़फ्फरनगर के भारग गाँव के जंगल में मिली थी, जो यहाँ पर ले आये गयी| प्रतिमा पर कोई लेख नहीं है, इसलिए लोग चतुर्थ काल की मानते है|