श्री नन्दीश्वरद्वीप

पार्श्वनाथ मंदिर के बराबर विशाल नन्दीश्वरद्वीप की रचना की गयी है| नन्दीश्वरद्वीप आधुनिक अठपहलू आकार का बना हुआ है| इसमें 52 चेतयालय एव पंचमेरु की रचना की गयी है| इसकी भव्यता रमणीयता और कलात्मकता दर्शकों के मन में शांति और वीतरागता के भावों को भर देती है| कार्तिक, फाल्गुन एव आषाढ़ की अष्टानिहका महापर्व में यहाँ देश के कोने कोने से श्रद्वालू यात्री आकर भक्ति पूर्वक सिद्धचक्र (विधान) पूजन कर अपने को धन्य मानते है| हस्तिनापुर में नन्दीश्वरद्वीप की महान रचना का कार्य वीर निर्वाण सं. 2501 मार्ग शीर्ष कृष्णा चतुर्थी शनिवार दिनांक 4 दिसम्बर सन 1982 इ. को क्षेत्र के प्रधाम्मंत्री सुकुमार चाँद जैन, मेरठ द्वारा प्रारंभ हुआ| इस प्रवेश द्वार स्व. साहू शांतिप्रसाद जैन व् उनकी ध० प० रमारानी जैन की पुण्य स्मति में साहू जैन ट्रस्ट द्वारा कराया गया एव सभी निर्माण कार्य में पूर्ण श्रेय संयोजक श्री हंसकुमार जैन सर्राफ मेरठ का है| उन्होंने अपनी धर्म परायणता पत्नी श्रीमती शैलाबाला जैन की मृत्यु के अनन्त पूज्य आचार्य श्री शान्तिसागर के समक्ष आजीवन धारण कर क्षेत्र की चहुंमुखी विकास में अपने आपको समर्पित कर दिया| अब वे घरबार छोड़कर स्थाई रूप से स्वर्गस्थ होने से पूर्व तक क्षेत्र पर ही और क्षेत्र की नि:स्वार्थ सेवा करते रहे| मैं समझता हूँ इस प्रकार के समर्पण के पीछे उनकी स्व: धर्मपत्नी श्री अद्रश्य प्रेरणा रही है| क्योकि वह महिला रतन 21 बार सम्मेद शिखर जी यात्रा को गई थी एव शिखरजी में नन्दीश्वर द्वीप में पूजन करने का उन्हें विशेष चाव था| श्री हंस कुमार जी ने 2 वर्ष की अल्पविधि में इस अदभुद रचना का कार्य संपन्न कराया| इसका शिखर 101 फीट ऊँचा है और इस पर 17 फीट ऊँचा कलश है| सारा नन्दीश्वर शवेत संगमरमर से निर्मित है| इस निलय की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा माघ शुक्ल पूर्णमासी वि. सं. 2511 दी. फरवरी को सभी जिन मंदिरों में सन 2003 व 04 में प्रधानमंत्री श्री जय प्रकाश जैन एडवोकेट के नेतृत्व में स्वर्ण कार्य किया गया|