श्री तीन मूर्ति मंदिर
श्री तीन मूर्ति मंदिर
इस मंदिर के समीप तीन मूर्ति मंदिर है| जिसका निर्माण मुख्य मंदिर के बाद हुआ था, इसमें तीन वेदियाँ है| बायीं ओर वेदी में भगवान शांतिनाथ की ५ फीट ११ इंच सलेटी रंग की चतुर्थकालीन अवगाहना वाली खडगासन प्रतिमा विराजमान है| प्रशस्ति से पता चलता है| इस मूर्ति की प्रतिष्ठा सं. १२३१ (सन ११७४) वैशाख सुदी १२ सोमवार को देवपाल सोनी अजमेर द्वारा हस्तिनापुर में हुई थी| यह प्रतिमा लगभग ५० वर्ष पहले टीले की खुदाई में दूसरी नासियों के निकट निकली थी| यह प्रतिमा हलके सलेटी रंग की है| मूर्ति के चरणों के निकट दोनों ओर चंवर धरी खड़े है| सिर पर पाषाण की छत्रमई सुशोभित है| छत्र के दोनों ओर हाथी पर बैठे इन्द्र भगवान पर पुष्प की वर्षा कर रहे है| चंवर वाहकों के नीचे हाथ जोड़े स्त्री पुरुष खड़े है जो संभवत: प्रतिष्ठापाक युगल है| पाद पीठ पर हिरन का चिहन और लेख लिखा है| इस प्रतिमा के समक्ष भक्त जन भक्तिपूर्वक शांतिविधान आदि कर अपार शांति का अनुभव करते है| बीच की वीडी के मध्य में काले पाषाण की सवा फीट अवगाहना की भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा दांये बांये भगवान शांतिनाथ और भगवान कुंधुनाथ की प्रतिमाएं विराजमान है| आगे की पंक्ति में शवेत पाषाण की एक पीतल की चौमुखी प्रतिमा स्थापित है| दायीं ओर की वेदी में वीर नि० सं. २४६८ में प्रतिष्टित काले पाषाण की सात फीट ऊँची भगवान महावीर स्वामी की मनोहारी प्रतिमा विराजमान है|
श्री समवशरण मंदिर
इस पंक्ति में विशाल रूप में भगवान मल्लिनाथ का समवशरण है| इस विशाल जिनालय का निर्माण समाज के सहयोग से एव श्रीमती कुसुमलता जैन धर्मपत्नी श्री महेंद्र कुमार जैन (सूत वाले) मेरठ की प्रेरणा से संयोजक श्री हंस कुमार जैन सर्राफ, मेरठ की देखरेख में हुआ| श्री आदिसागर जी महाराज (मुरार वालों) की प्रेरणा एव जैन समाज के सहयोग से समवशरण मंदिर में ९९२ चौत्याल्य चारोँ चार पुष्पक विमानों से पुष्प वर्षा हो रही है| चारोँ ओर ९-९ इन्द्र चक्र लिए खड़े है| बाहर सभाएं बने हुई है| समस्य समवशरण काले संगमरमर से बना है| इस जिनालय की प्रतिष्ठा वी नि. सं. २४२० फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष त्रित्य दिन सोमवार को आचार्य विद्यानंद जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई|


