श्री कुंधूनाथ मंदिर
श्री कुंधूनाथ मंदिर
समवशरण मंदिर के समीप कुंधुनाथ जिनालय में वीराब्द २४९९ में विक्रमाब्द २०२९ फाल्गुन मास कृषणपक्ष की पंचमी गुरूवार को श्री पन्नालाल जी सोनीपत द्वारा प्रतिष्ठित भगवान कुंदुनाथ की कलि संगमरमर की पदमासन मनोज प्रतिमा विराजमान है| श्री महावीर जिनालय एव श्री चंद्रप्रभु जिनालय कुंधुनाथ मंदिर के समीप है|
श्री बाहुबलि मंदिर
आगे चलकर बायीं ओर मंदिर प्रांगन में विशाल श्री बाहुबलि मंदिर है| जिसमें गुलाबी संगमरमर की एक विशालकाय भगवान बाहुबलि की प्रतिमा स्थापित है| वीर नि. २५०१ विक्रम सं. २०३१ माघ शुक्ल १३ मंगलवार को आचार्य धर्मसागर जी ससंध, आचार्य विद्यानंद जी आदि गुरुओं के सानिध्य में भगवान महावीर के २५०० परिनिर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में अपने माता पिता की स्म्रति में लाला उग्रसेन जैन महिंद्रा प्रसाद जैन (सूत वाले) मेरठ ने प्रतिष्ठा करायी| जब यात्री घुमावदार रास्ते से ऊपर पहुंचता है तो विशालकाय भगवान बाहुबलि के दर्शन कर अपार आनंद का अनुभव करता है| बाहुबलि मंदिर के पीछे बायीं ओर घूमकर लगभग १०० बीघे का विशाल मैदान है| जिसको एक उपवन का रूप दिया गया है और उसमें अनेक तरह के वृक्ष लगाए गए है|


